आपके गंभीर सवालों के बचकाने जवाब

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एक आम इंसान का रेप कैसे हो जाता है ? एक आम इंसान रेपिस्ट कैसे बन जाता है ? आप एक आम इंसान हैं सोचिये, क्या किसी भी परिस्थिति में, किसी भी तरीके के अभाव में आप ऐसा कुछ कर पाएंगे, क्या आप ऐसा सोच भी सकते हैं ? क्या आपके घर के आस पास ऐसा कुछ हुआ या होता है ?

या आपके स्कूल या हॉस्टल में ऐसा हुआ है? क्या आपके ऑफिस में मज़ाक़ के नाम पर शोषण होता है ? क्या आपके घर में प्रेम से पहले रेप करना सिखाया जाता है ? क्या अापने अपनी माँ से कभी पूछा की उनकी जिंदगी में प्रेम है ज़बरदस्ती है या समझौता है ? क्या आपकी बहन अपनी शादी में ख़ुश है ?

रिश्ते और रिश्तेदार

“एक बार शादी हो जाए फिर सब ठीक हो जाएगा” क्या इस एक बात की तर्ज पर माँ बाप अपनी बेटियों का रेप नहीं करवा रहे ? क्या नए घर, कपडे, रिश्ते और पती/पत्नी के नाम पर हर बार एक साथी ही मिलता है ? शादी और सम्भोग के बीच का पेचीदा सम्बन्ध समझना कितना ज़रूरी है ?

 

मैं खुद

क्या आपने कभी ख़ुद का रेप होते हुए देखा है ? क्या अापने समझौते के नाम पर लेन देन के नाम पर ख़ुद के साथ ज़बरदस्ती करवाई है ? प्रेम और रेप के बीच का अंतर समझने में कितना वक्त लगता है?

गाली

क्या आपने कभी गाली दी है ? क्या अापने अपशब्दों पर विचार किया है? क्या गलियां देना रेप को बढ़ावा देना है ? क्या मर्द और महिला अपनी यौनि तक ही सीमित हैं ? क्या गालियां देना अपने गुस्से को ज़ाहिर करने का सही तरीका है ? क्या जो लोग गाली नहीं देते वो गुस्सा ज़ाहिर नहीं करते? आप घर में गलियां नहीं देते इसका मतलब ये सांस लेने जितना ज़रूरी तो नहीं है।

समस्या

घर वाले इस बारे में बात नहीं करते, सरकार कोई सख्त कदम नहीं उठाती, सेक्स एजुकेशन अच्छी नहीं हैं हमारे देश में, आदमी-औरत का फांसला इतना बढ़ चूका है की अब एक दूसरे को इंसान नहीं कोई क़ीमती या ज़रुरत पूरी करने वाला सामान समझा जाने लगा है। घर वालों ने आपसे बात नहीं की, वो पढ़े लिखे नहीं हैं आप तो पढ़े लिखे हैं अापने कितनी बार इस बारे में घर पर चर्चा की ?

ख़ून इस बात पर नहीं खौलता की एक बच्ची का रेप हुआ है बल्कि इस बात पर खौलता है की उसकी जात ये है/थी, उसे जला दिया गया, सरकार ने कुछ नहीं किया, एडमिनिस्ट्रेटिव फोर्सेज ने कुछ नहीं किया, एक पार्टी के लोगों को दूसरी पार्टी पर कीचड उछालने का मुद्दा मिल गया, फेसबुक पर सबको सहानुभूति दिखानी है की हम इस दौड़ में पीछे न रह जाएं

Hathras rape case thedhibri

वैसे ये बात शुरू कहाँ से हुई ? रेप ! अच्छा रेप नहीं रेप तो आम बात है, रेप तो हर रोज़ होते हैं, हर तीसरे घर में रेप होता है , और हर दूसरी लड़की/लड़के के साथ मोलेस्टेशन, लेकिन हम इतने दोगले हो चुके हैं की अब हमारा खून सिर्फ हमारी खोखली इमेज को बनाने के हिसाब से खौलता है? अगर रेप असल में हमें सोचने पर मजबूर करता तो हमारा खून अभी तक सूख चूका होता और कम से कम भारत में इस बढ़ती आबादी की समस्या तो दूर होती।

हम में से ही कोई इसी वक्त रेप कर रहा है और हम में से ही किसी का रेप हो रहा है। किसी को मत बताइये लेकिन ख़ुद से सवाल करिए की क्या आप एक पोटेंशियल रेपिस्ट हैं ?

 

 


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