तुम आ गए हो ,नूर आ गया है- किशोर कुमार

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आते जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पर ,

कभी कभी, इत्तेफ़ाक से , कितने अनजान लोग मिल जाते हैं,

उनमें से कुछ लोग भूल जाते हैं, कुछ याद रह जाते हैं…

अगर हम किशोर कुमार जी के ऊपर कुछ लिखना चाहें, और सिर्फ इतना लिख कर ही छोड़ दें तो मुझे पूरा यकीन है कि ये पंक्तियां उनकी छवि के साथ पूरा न्याय करेंगी ।

किशोर कुमार संगीत के खूबसूरत और आवारा सड़कों पर उन्हीं सैकड़ों अनजान लोगों में से एक हैं जो हमारी पुरानी पीढ़ियों को याद रहे, हमें याद हैं, और जब तक संगीत रहेगा किशोर कुमार को हर एक पीढ़ी याद रखेगी ।

किशोर दा ने कईयों तरह के गाने गाए । कुछ जुगलबंदी में तो वहीं कुछ अकेले भी।

कुछ एक गानों को अलग अलग गायकों ने भी अपने कलेवर में गाया , पर जो आवाज़ हमें आज तक याद रही वो बस किशोर कुमार की आवाज़ है।

आज हमारा मन जिस आवाज़ में  ‘ हमें तुमसे प्यार कितना ‘ गुनगुनाता है , वो आवाज़ किशोर कुमार की ही होती है ।

 

“किशोर दा हर उस धीर – गंभीर व्यक्ति के लिए गाते हैं जिसके दिल में एक अबोध बालक आज भी धूल मिट्टी भरे जमीन पर गुलाटियां मारने की ज़िद करता है ।”

किशोर कुमार की आवाज आज़ादी का हस्ताक्षर थी

किशोर कुमार की आवाज़ महज़ एक गायक की आवाज़ नहीं है, बल्कि नए नए पिंजड़े को तोड़ कर आज़ाद हुए उस परिंदे की आज़ादी का हस्ताक्षर है,

जिसके लिए खुले आसमान का ख्वाब तक देखना असंभव माना जाता था ।

किशोर दा का असली नाम था आभास कुमार गांगुली , और उनका जन्म आज ही के दिन 4 अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश के खांडवा में हुआ था ।

उन्होंने बॉलीवुड में अपना कदम एक्टर बनने की ख्वाहिश लिए रखा, और वो अच्छे और सफल एक्टर बने भी, पर उनको याद रखा गया उनकी आवाज़ के लिए ।

जिस दौर में किशोर कुमार ने गायकी की दुनिया में अपना कदम रखा, उस दौर में बिना सीखे गाने की सोचना भी हिम्मत का काम था।

उस दौर में भी किशोर दा ने अपनी आवाज़ की ऐसी रौशनी बिखेरी कि उस दौर के बड़े बड़े सितारे आज धुंधले हो गए पर किशोर दा पहले से कहीं  अधिक आज जगमग हैं ।

किशोर दा रिकॉर्डिंग के भगवान माने जाते थे । ऐसा कहा जाता था कि किशोर कुमार की आवाज़ माइक के सबसे संवेदशील हिस्सों पर एकदम सधे स्वरों में छूती थी ।

किशोर दा को गाते हुए सुनना एक खुले आकाश में

आभासी गोते लगाने जैसा हुआ करता है ।

 

 

 

“किशोर कुमार की आवाज़ मस्ती का बादल है जो अचानक से फूट पड़ता है और सुनने वाला मस्ती से नहा उठता है “

 

सदाबहार थे किशोर कुमार

किशोर दा हर उस धीर – गंभीर व्यक्ति के लिए गाते हैं जिसके दिल में एक अबोध बालक आज भी धूल मिट्टी भरे जमीन पर गुलाटियां मारने की ज़िद करता है । बॉलीवुड में युडलिंग को सबसे पहले ले आने वाले भी किशोर दा ही हैं ।

उनको इस विधा का शहंशाह माना जाता है ।

इस तकनीक को जिम्मी रोजर्स ने इजाद किया था जिन्हें ‘ फादर ऑफ कंट्री म्यूज़िक ‘ भी कहा जाता है।

किशोर दा के बाद कुमार शानू और अभिजीत ने भी इस विधा को गाने का प्रयास किया ,  पर वो बात कभी नहीं आई जो किशोर दा के गाने में आती थी।

गायकों को पता होगा कि गाने में मस्ती का मूड ले आना कितना मुश्किल काम होता है , पर किशोर कुमार की आवाज़ में वो मस्ती अपने आप फूट पड़ती है।

किशोर कुमार की आवाज़ मस्ती का बादल है जो अचानक से फूट पड़ता है और सुनने वाला मस्ती से नहा उठता है ।

किशोर दा ने 574 से भी ज्यादा गाने गाए और उनमें 8 गानों को सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला , जो कि अभी तक अविजित रिकॉर्ड है ।

 

जब किशोर दा हुए थे  बैन

किशोर दा न सिर्फ बॉलीवुड सेलिब्रिटी थे बल्कि एक विद्रोह की आवाज़ भी थे ।

1975 में कांग्रेस ने जब देश पर इमरजेंसी लगाई, उस वक़्त कांग्रेस की हालत काफी खराब हो चली थी।

आम आदमी के दिलों को फिर से जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने सोचा कि क्यों न किशोर दा से अपने लिए गाना गवाया जाए ।

किशोर दा ने इंदिरा गांधी के लिए गाने से इंकार कर दिया था, जिसके फलस्वरूप इंदिरा गांधी ने उनके ऊपर 3 साल का बैन लगा दिया ।

 

किशोर दा ने अपनी स्वर्णिम आवाज़ से कई अभिनेताओं को शिखर तक पहुंचाया जिसमे देवानंद , राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन प्रमुख हैं।

 

आज किशोर दा का जन्मदिन है ।

आइए सुनते हैं किशोर दा की आवाज़ में यह गीत और याद करते हैं बॉलीवुड संगीत के शहंशाह को..

 

https://youtu.be/XGsx6Yi7a_Y


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