TRP की ड्रग्स चाटता भारतीय मीडिया!!

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किसी के माँ बाप को अगर अपने बेटे के बैग से चरस की पुड़िया भी मिल जाए न, वो भी इतना ड्रामा नहीं करेंगे, जितना हमारी भारतीय मीडिया ने किया हुआ है।

सेलिब्रिटीज की नाभि से भी ड्रग्स निकालता मीडिया:

कुछ कुछ मीडिया वीडियो देख कर तो यह लग रहा है, जैसे कैमरामैन फलाना के साथ रिपोर्टर ढिमकना ने खुद स्मैक की लकीरें खींच कर, कवरेज किया हुआ है। अभी एक वीडियो आया है, जिसमे रिपोर्टर जोरों से चिल्ला चिल्ला कर किसी रैंडम चलती कार को दीपिका पादुकोण की कार बता रही है और अपनी गाड़ी में बैठ उस कार से पूछ रही है ” दीपिका पादुकोण बताइए, क्या आप ड्रग्स लेती हैं”, मतलब , हँसते हँसते पेट दुख जाए ऐसी पत्रकारिता देख कर, और जब हँसने के बाद आप चुप हो जाएं, तब रोएं, ऐसे घिनोने मीडिया सर्कस पर, जहाँ देश की अनगिनत समस्याओं को छोड़कर, रिपोर्टर सेलिब्रिटीज की नाभि से भी ड्रग्स निकालने का अथक प्रयास करते नज़र आ रहे हैं। नारकोटिक्स विभाग ने इन रिपोर्टर्स को डिपार्टमेंट जॉइन करने का आफर लेटर भी भेजा है। इन रिपोर्टर्स की तेज नाख को देखकर बम स्क्वाड ने यह निर्णय लिया है कि सनिफ्फिंग डॉग्स की जगह अब इन रिपोर्टर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। सच में, दयनीय है ऐसी पत्रकारिता।

भारत में ड्रग्स तस्करी का विकराल रूप:

 

हाँ यह सच है कि हिंदुस्तान में ड्रग्स तस्करी की समस्या एक विकराल रूप ले चुकी है जहाँ छोटे छोटे शहर भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। स्कूली बच्चों को स्मैक हीरोइन और न जाने कौन कौन के नशों की लत लग चुकी है। यह बर्बादी हम सभी अपने अपने गाँव, शहरों में हर रोज देख रहे हैं। मगर सवाल उठता है, ऐसे गाँव जहाँ आज भी बिजली नहीं पहुँच पाई है, वहाँ भी ये नशीले पदार्थ अपनी दुकान कैसे खोल रहे हैं?, पहाड़ों तक में स्मैक की बिक्री कैसे हो रही है? और इन नशीले पदार्थ की तस्करी की रोक के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?लेकिन अफसोस, इन अहम सवालों से कोसों दूर मीडिया, TRP यानी टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट के पैने दाँत लिए चीर फाड़ रही है असल मुद्दों को।

मोहल्ले की आंटियों को काम्प्लेक्स देती मीडिया:

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सेलिब्रिटीज से पूछताछ CBI का काम है, और उनके नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नारकोटिक्स विभाग करेगा लेकिन इन बड़े बड़े TRP भक्त न्यूज़ चैनल्स का काम है, सुबह शाम चिल्ला चिल्ला कर मोहल्ले की आंटियों की तरह सुई सी बात का संबल बनाना। आजकल तो मोहल्ले की आंटियों भी काम्प्लेक्स में हैं इन न्यूज़ एंकर और रिपोर्टर्स से, एक आंटी तो कह रही थी ,’हमसे सीख के गए थे, अब देखो कितनी उचाईयों में पहुँच गए, हमारे घरों तक में कलेश करा जाते हैं, एक बार तो मेरे लड़के की आँखें चढ़ी हुई थी और मैं देख रही थी, ये ड्रग्स वाली चिल्लम चिल्ली, मैंने आव देखा न ताव, दो तमाचे रसीद दिए बेटे के, वो तो बाद में पता चला, बेचारे को बुखार हुआ था, हाए इन कलमुहे न्यूज़ चेंनल वालों पे तो कभी भरोसा ही नहीं करना चाहिए’

आर्टिस्ट, मीडिया और ड्रग्स:

कुछ दिनों पहले एक आर्टिस्ट “राघव जुयाल” ने अपने सोशल मीडिया में एक किस्सा सुनाया कि उनके छोटे भाई को बालतोड़ की समस्या होनी शुरू हुई और उनके भाई अपनी मम्मी के साथ एक डॉक्टर के पास गए, राघव जुयाल के भाई का शरीर से पतला है और बाल लंबे हैं, वह शार्ट मूवीज बनाते हैं और देहरादून में एक जाने पहचाने आर्टिस्ट हैं। उनके हुलिए और उनके प्रोफेशन को समझकर उस डॉक्टर ने बिना चेक उप किये उन्हें और उनकी माँ को गुस्से से बोला कि ‘इसका ड्रग्स वर्गस कम करवाओ, ये आर्टिस्ट लोग सब के सब यही करते हैं’.सोचिए एक डॉक्टर इस तरह की बात कर रहा है, क्या पागलपन है इस मीडिया सर्कस का कि इसका सीधा असर हमारे समाज पर हावी हो रहा है और हम बस एक बंदर की तरह वह समाज बनते जा रहे हैं।

तो भैया,ऐसे हज़ारों किस्से हमारे अगल बगल हर रोज घट रहे हैं जहाँ बिना किसी तर्क के किसी को कुछ भी घोषित कर दिया जाता है, और हम उन झूठी चिल्लाती आवाज़ों में खो रहे हैं अपनी आवाज़। इसीलिए खुद की नज़रों से समझिए इस संसार को, न कि TRP की चरस चाटते खोखले न्यूज़ चैनल्स की, और अगर आपके पास भी कोई हास्यास्पद पत्रकारिता के किस्से हों, जिन्हें सुन कर ठहाके मारे जा सकें तो जरूर शेयर करें।


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One thought on “TRP की ड्रग्स चाटता भारतीय मीडिया!!

  • September 29, 2020 at 3:15 pm
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    बहुत सही लिखा है भईया.. ये न्यूज़ चैनल वालों के लिए तो हमारे इधर एक कहावत है जो बहुत सही बैठती है ” झूडा का भूत बनाना”

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