वो वैज्ञानिक जो दावा करता था उसने वर्तमान, भूत और भविष्य एक साथ देखा है !

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“वो व्यक्ति जो ब्रह्मांड को जानने और समझने लगे थे”

आई.आई.एम लखनऊ के एक पूरा छात्र कुशल सिंह अपनी एक रिपोर्ट में इसका ज़िक्र करते हैं और बताते हैं की आज से 150 साल पहले के समय की कल्पना गर की जाए जब बिजली नहीं थी और सिर्फ मशालें और लालटेन हुआ करती थीं. और अगर बिजली व बल्ब का आविष्कार नहीं हुआ होता तो आज हम जिस दौर में होते जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे. तो बिजली और बल्ब का अविष्कार किसने किया? आप कहेंगे फेराडे और एडिसन तो आपको बता दूँ कि आप गलत है.

 

मुनि अगस्त्य के प्रारूप की मूर्ति कोडिक्लम में मिली थी जोकि अभी कैलास मियोसियम में संग्रहित है !

बिजली का अविष्कार महर्षि अगस्त्य ने किया था. यकीन नहीं हैं न? उनके ग्रन्थ अगस्त्य संहिता में आप पढ़ सकते हैं. उन्होंने न केवल बिजली बल्कि बैटरी, आधुनिक नौकाचालन, विद्युत वहन, पैराशूट, हवाई जहाज और उड़ने वाले कपड़ों तक के बारे में लिखा है. खैर इसके बारे में कभी और चर्चा कर सकते हैं फिलहाल यहाँ हम निकोला टेस्ला और उनके रहस्मयी जीवन के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

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सर निकोला टेस्ला

यहाँ एक बार फिर कहना सही रहेगा कि आज के समय में जो बिजली हम अपने घरों में जलते हुए देख रहे हैं, उसके लिए एडिसन नहीं बल्कि आपको सर टेस्ला को धन्यवाद देना चाहिए. क्यूँकि अगर वो न होते तो आज का आज ऐसा नहीं होता. एडिसन, टेस्ला के बॉस थे और उनका सिद्धांत DC करंट पर बेस्ड था जबकि टेस्ला AC करंट को ज्यादा बेहतर मानते थे और बात सही भी थी. DC करंट से घरों में बिजली तो आने लगी थी लेकिन उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बहुत मुश्किल था इसके लिए हर एक मील के फासले पर पॉवर स्टेशन बिठाना पड़ता था जोकि काफी खर्चे का काम था. जबकि AC करंट के साथ ऐसा नहीं था. शायद एडिसन, टेस्ला की इस महान खोज को भांप चुके थे लेकिन फिर भी उन्होंने टेस्ला की खोज को बकबास करार दिया. अगर वो उनकी थ्योरी को सही मानकर बढ़ने देते तो एडिसन जोकि वैज्ञानिक कम व्यापारी ज्यादा थे, खुद बर्बाद हो सकते थे इसीलिए उन्होंने बहुत समय तक टेस्ला के काम को दुनिया के सामने तक नहीं आने दिया.
हालाँकि बाद में टेस्ला उनसे अलग होकर अपनी पहचान और अपने सिद्धांत को सबके सामने ला पाए थे. लेकिन एडिसन आजीवन उनके प्रतिद्वंदी रहे और पैसे तथा साख से मजबूत होने के कारण जीवन भर टेस्ला को नुकसान पहुंचाते रहे. यहाँ तक कि एडिसन ने टेस्ला को गिराने के लिए पूरे अमेरिका में AC करंट के खिलाफ अभियान तक छेड़ दिया था. उनका कहना था कि AC करंट खतरनाक है और इससे लोगों की जान को खतरा पैदा हो सकता है. दूसरी ओर टेस्ला AC करंट के सस्ता होने की वजह से इसकी वकालत कर रहे थे. लेकिन एडिसन की पहुँच और रुतबे के आगे वो कमजोर थे और अंत में थकहार कर उन्होंने इसे सही और सुरक्षित साबित करने के लिए खुद को ही AC करंट का 2,50,000 वोल्ट का झटका लगाया और रहस्मयी रूप से वो जिन्दा रहे, उन्हें कुछ भी नहीं हुआ.

“सपनें का संसार रचते थे टेस्ला”

टेस्ला बचपन से ही अलग तरह के बालक थे. उन्हें सपने बहुत आते थे और याद रहे सपनों की क्रियात्मकता को जो व्यक्ति समझ-बूझ पाता है उसके लिए एक अलग ही आयाम के दरवाजे खुल जाते हैं. बहुत सारे अजीब से सपनों के बीच टेस्ला का नियाग्रा फॉल्स का सपना भी था और उसके साथ ही एक पहिया भी. हालाँकि तब तक उन्होंने कभी भी नियाग्रा फॉल्स के बारे में न तो सुना था और न जाना था. आगे चलकर उन्होंने ही न्यूयॉर्क के नियाग्रा फॉल्स में पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट का डिजाइन तैयार किया जो की एक पहिये के रोटेशन पर बेस्ड था, पानी के प्रेशर से पहिये के घूर्णन से बिजली की उत्पत्ति होती थी.
टेस्ला के पिता एक पादरी थे और उन्हें भी वो पादरी बनाना चाहते थे लेकिन वो इंजीनियर बनाना चाहते थे. ग्रेजुएट होने के बाद वो एक बार कोलेरा से बुरी तरह बीमार हुए और तकरीबन 9 महीने तक बिस्तर में रहे वो लगभग मरने की ही कगार पर थे तो उनके पिता ने एक प्रयोग किया उनके अवचेतन मन की शक्ति पर उन्होंने कहा कि टेस्ला अगर तुम ठीक हो जाते हो तो मैं तुम्हें इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिलवा दूंगा और आश्चर्यजनक रूप से टेस्ला जल्दी ही स्वस्थ हो गए और उनके पिता ने अपना वादा पूरा किया.

1901 में टेस्ला ने एक क्रांतिकारी प्रॉजेक्ट पर काम किया. वह क्रांतिकारी काम, तार के बगैर असीमित बिजली की आपूर्ति से संबंधित था. आज टेस्ला द्वारा किए गए कामों का नतीजा ही है कि हम वायरलेस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. आज अगर वायरलेस इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर काम हो रहा है तो उसका श्रेय भी टेस्ला को जाता है. टेस्ला ने पूरी दुनिया में तार का इस्तेमाल किए बगैर बिजली की सप्लाई देने का सपना देखा था. इसके लिए उन्होंने न्यूयॉर्क के लॉन्ग द्वीप के शोरहैम में अपना लैब खोला था. लैब में 185 फीट ऊंचा एक टावर बनाया था जिसके ऊपर 65 फीट ऊंचा कॉपर का गुंबदनुमा ट्रांसमिटर था. टेस्ला इस टावर की मदद से सिग्नल का संचार करना और पूरी दुनिया को बिजली की सप्लाई देना चाहते थे. उनके इस प्रॉजेक्ट के लिए वित्तीय सहायता जे.पी. मॉर्गन ने मुहैया कराई थी. टेस्ला पक्के व्यापारी नहीं थे, जिस वजह से उपलब्धियों के बावजूद वित्तीय रूप से हमेशा परेशानी में रहे. बाद में मॉर्गन को ऐसा लगा कि उसे टेस्ला के तार के बगैर फ्री बिजली पहुंचाने के कॉन्सेप्ट से कुछ फायदा नहीं होगा और सबको असीमित बिजली मुफ्त या लगभग बिना कीमत के मिलने लगेगी तो उनके जैसे उद्योगपतियों का तो बंटाधार हो जाएगा इसलिए मॉर्गन ने उनको वित्तीय सहायता देना बंद कर दिया. उनके वॉर्डन क्लिप स्थित लैब को भी एक फिल्म प्रोसेसिंग कंपनी को बेच दिया. 1917 में अमेरिकी सरकार ने टेस्ला के आंशिक तौर पर पूरे हुए टावर को भी गिरा दिया क्योंकि सरकार को चिंता थी कि जर्मनी के जासूस उसका इस्तेमाल पहले विश्व युद्ध के दौरान सूचनाओं में सेंध लगाने के लिए करेगा.

“विज्ञान को वेदों और फलसफों के समानांतर समझते थे टेस्ला”

टेस्ला ने कॉलेज के बाद फिलॉसफी का भी अध्ययन किया था, उनके पिता तो पादरी थे ही तो उनके आध्यात्मिक होने के तारों को वहां से भी जोड़ा जा सकता है और उनका ये अध्यात्म तब और भी प्रगाढ़ हो गया जब वे 1893 में स्वामी विवेकानंद से फ्रांस में मिले. इस बात की पुष्टि स्वामी विवेकानंद के एक लेटर से भी होती है. जिसमें स्वामी जी ने लिखा है, ‘मिस्टर टेस्ला सोचते हैं कि वे गणितीय सूत्रों के जरिए बल और पदार्थ का ऊर्जा में रूपांतरण साबित कर सकते हैं. मैं अगले हफ्ते उनसे मिलकर उनका यह नया गणितीय प्रयोग देखना चाहता हूं (विवेकानंद रचनावली, वॉल्यूम – V).’ विवेकानंद इसी पत्र में आगे कहते हैं कि टेस्ला का यह प्रयोग वेदांत की वैज्ञानिक जड़ों को साबित कर देगा, जिनके मुताबिक यह पूरा विश्व एक अनंत ऊर्जा का रूपांतरण है.

दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म का यह दर्शन कई मायनों में अमेरिकी समाज को वैज्ञानिक लगा. किसी भी वस्तु या घटना के मूल में एक परम सत्ता की उपस्थिति और प्रकृति के साथ जीवन की एकात्मता वेदांत दर्शन का ऐसा मूल सूत्र था जिसने वैज्ञानिक समुदाय को भी अपनी तरफ आकर्षित किया. टेस्ला भी इससे अछूते नहीं रह सके थे. स्वामी जी से न केवल उनका जीवन प्रभावित हुआ बल्कि स्वामी जी ने उन्हें वेदांत कॉस्मोलॉजी या आकाशीय जेडपीएफ (जीरो पॉइंट फील्ड) का ज्ञान भी दिया जिसको सुलझाने के लिए टेस्ला सालों से प्रयासरत थे. स्वामी विवेकानंद ने टेस्ला को आकाश यानी दो अणुओं के बीच के स्पेस के बारे में भी समझाया था.

टेस्ला पदार्थ-ऊर्जा संबंध को गणित के माध्यम से स्थापित करने में कामयाब नहीं हो पाए थे लेकिन वेदांत दर्शन के प्रभाव के चलते वे इसे मानने लगे. इसके बाद उन्होंने वेदांत दर्शन पर गंभीरता से चिंतन शुरू किया.
बाद में अलबर्ट आइंस्टीन ने पदार्थ-ऊर्जा संबंध समीकरण को साबित किया था और यह एक तरह से वेदांत दर्शन के एक मूल विचार की स्थापना थी.

टेस्ला एक रहस्मयी और भविष्यविद वैज्ञानिक थे !

टेस्ला एक रहस्मयी वैज्ञानिक थे जिनको अपने समय से आगे के अविष्कारों के बारे में ज्ञान था और जिनके बारे में उन्होंने भविष्यवाणी भी की थी. उन्होंने अपने दौर में ही आने वाले भविष्य में न केवल होने वाले अविष्कारों की घोषणा की थी बल्कि उन पर काम भी करना शुरू कर दिया था जिनमें से कुछ थे ड्रोन, वाई-फाई, प्लास्टिक, मोबाइल फोन, हाई स्पीड एयर क्राफ्ट और सबसे अहम् डेथ बीम जिससे किसी भी देश की सीमायों को ऐसे सुरक्षित किया जा सकता था कि न बंदा, आदम जात, न हवाई जहाज यहाँ तक कि परिंदा भी घुसते ही मारा जाता, जिसका एक ही प्रहार हजारों की तादात में सैनिको का सफाया कर सकता था.

हर क्रिएटिव आदमी के कुछ ओबसेशन होते हैं. टेस्ला भी कुछ चीजों से बहुत पोजस्ड थे जैसे कबूतरों से उनका अथाह प्रेम और न० 3,6,9 को लेकर उनका रवैया, जिसे वो ऊर्जा, वाइब्रेशन और फ्रीक्वेंसी से जोड़कर देखते थे. वो जीवन का हर काम 3, 6 या 9 न० से रिलेटेड संख्या से करना चाहते थे. मसलन अपने ऑफिस में घुसने से पहले वो उसका 3 बार चक्कर लगाते, अपने कदम भी गिन कर रखते थे. खाने की टेबल पर 18 नेपकिन रखते और किसी भी होटल के उसी कमरे में रुकते जिनमें या तो ये न० हों या फिर इनसे वो संख्या 3,6,9 से डिवाइडेड हो सकती हो.

उनकी इन अजीब रहस्मयी आदतों, उनकी कल्पना और उनके अविष्कारों को देखकर कुछ लोगों का कहना था कि वो दूसरी दुनिया के लोगों से बात करते थे और यहाँ तक कुछ लोग तो उन्हें एलियन ही कहते थे. बात एक हद तक सही थी लेकिन जो सब उनके साथ घटित हो रहा था मेरा मानना है कि वो सब अध्यात्म के कारण ही था. अध्यात्म किसी विशेष धरम या पूजा-पाठ से रिलेटेड नहीं है, अध्यामित्क शक्तियां केवल योग और ध्यान से ही जाग्रत नहीं होती बल्कि जो काम आप बहुत तल्लीनता, एकाग्रता और ध्यान से करते हैं तो उसकी वजह से भी आपकी चेतना का विस्तार होता है जैसा कि टेस्ला के साथ हुआ था. उन्होंने अपनी अध्यात्मिक चेतना को इस कदर जाग्रत कर लिया था कि वो अवचेतन मन और दिमाग की उन शक्तियों का प्रयोग कर सकें जो साधारण मानव की सोच से भी परे हों.

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Nikola tesla’s book “The Problem of Increasing Human Energy”

वो ब्रह्मांड को जानने और समझने लगे थे. उन्हें टाइम ट्रेवलिंग की थ्योरी पर न केवल भरोसा था बल्कि उन्होंने दावा भी किया था कि उन्होंने वर्तमान, भूत और भविष्य तीनों कालों को एक साथ देखा है. उनका यह दावा उनकी किताब ‘द प्रॉब्लम ऑफ इंक्रीजिंग ह्यूमन एनर्जी’ में पढ़ भी सकते हैं. यहाँ तक कि उन्होंने कहा था कि ट्रोजन हॉर्स के जैसा एक उपकरण बनाकर तारों से लपेटकर एक विशेष चुम्बकीय क्षेत्र में रखने से समय यात्रा की जा सकती है. कौन जाने उन्होंने ऐसा कोई उपकरण इजाद भी कर लिया हो. क्योंकि जब 1943 में टेस्ला की मृत्यु हुई थी तो सबसे पहले FBI ने उनके घर पर छापा मारा और उनकी खोज से जुड़े सारे कागजात को जब्त कर लिया और उनके अविष्कारों से जुड़ी हुयी किसी भी चीज को पब्लिक नहीं किया.

आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि जिस समय उनकी मृत्यु हुयी वो एक होटल के कमरा न० 3327 में थे, जो कि 3 से विभाजित होता है और इससे भी ज्यादा जरुरी उनके कमरे में एक सफ़ेद कबूतर भी मिला था. बहुत कुछ हमें संयोग लगता है लेकिन यकीन मानिये संयोग जैसा कुछ भी नहीं होता..अगर होता है तो वो है प्रकृति की साजिश. जो हमारी समझ से परे है तो हम इसे संयोग या दुर्घटना जैसा नाम देकर फाइलों और कहानियों में दबा कर रख देते हैं. यही हैं इस ब्रम्हाण्ड के अबूझ खेल और रहस्य.


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Anuj Tiwari

• मोमिन ने कहा : "मैं वही हूँ मोमिन ए मुब्तिला" मैं 'मुब्तिला' हूँ और था, मैं वही देव हूँ जिसके लिये कहा गया है "निर्विघ्नं कुरू मे देव: सर्वकार्येषु सर्वदा" मैं वहीं था जब द्रोपदी के आंचल का पहला कोना दुशासन ने थामा था, मैं 'असद-ए-ख़स्ता जां" के "ख़स्ता" में हूँ, मैं ऊधौ के पैरों की धूल में था, मैं शिव के अमृत मंथन में ख़लल डालने वाला, मैनें विश्वकर्मा के छैनी हथौड़े चांडे, मैं बुद्ध के महापरिनिर्वाण का साक्षी, मैं वर्द्धमान का जिन, मैनें ब्रह्मा को एकाकार होते हुए देखा था, मैं शाहजहां के ताजमहल का मज़दूर जिसकी बांहे सलामत हैं, अर्जुन के गांडीव को बनाया मैनें, मैं तितलियों का मुसव्विर ! •

2 thoughts on “वो वैज्ञानिक जो दावा करता था उसने वर्तमान, भूत और भविष्य एक साथ देखा है !

  • August 7, 2020 at 8:32 am
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    शुक्रिया अनुज जी इस लेख को जगह देने के लिए?

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