सत्यजीत रे और उनका सिनेमा

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भारतीय सिनेमा में दादा साहेब फाल्के और राज कपूर के बाद कई दिग्गज हुए,

लेकिन तब तक-जब तक यहाँ “सत्यजीत रे” ने पैर नहीं रखे थे, सत्यजीत उस समय के बेहतरीन फिल्ममेकर, स्क्रीनराइटर, म्यूजिक कंपोजर, ग्राफिक्स आर्टिस्ट, गीतकार, कॉलिग्राफर, लेखक, फिल्म क्रिटिक और एक कमाल के मुसव्विर थे जिनकी ब्रश का जादू उनकी फिल्मो के पोस्टर्स पर भी दिखता था।Satyajit ray and his cinema

उन्होंने आते ही न सिर्फ देश बल्कि विदेश तक के सिनेमा पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर’दी। सत्यजीत के लिए एक बार जापान के ग्रेट डाएरेक्टर “अकीरो कुरोसावा” ने ऑस्कर की अपनी स्पीच में कहा था- ‘अगर आपने सत्यजीत रे का सिनेमा नहीं देखा तो मतलब है आप सूरज या चांद देखे बगैर दुनिया में रह रहे हैं, सत्यजीत का फिल्मों को लेकर जुनून और ज्ञान इस कदर था कि उनकी बताई चीजों को हॉलीवुड डाएरेक्टर भी मानते थे। सत्यजीत रे को आज दुनिया को अलविदा कहे करीब 30 बरस से ज्यादा वक्त बीत गए !

Satyajeet old pic
1955 में आयी रे की पहली फ़िल्म “पथेर-पांचाली” की स्क्रीनिंग पर उस समय भारत के प्रधानमंत्री प० नेहरू और कलकत्ता के मुख्यमंत्री बी.सी रॉय और उस समय के नामी फ़िल्ममेकर्स पहुँचे पर पूरे हॉल में वह फ़िल्म सिर्फ नेहरू को पसंद आयी और बाकी सब ने पथेर-पांचाली की आलोचना की और उस फ़िल्म को भला-बुरा कहा परंतु नेहरू ने रे को सलाह दी की इसे “कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल” में लेके जाओ। भारत में इस फ़िल्म की बेहद निंदा हुई  – भारतीय प्रोड्यूसर’स और डिस्ट्रीब्यूटर’स ने इस फ़िल्म को सिनेमाघरों में जगह नहीं दी,

अपनी तीन साल की मेहनत का ये हाल देख रे काफी परेशान हुए मगर नेहरू ने रे को उनकी इस फ़िल्म के साथ 1956 में “कांन्स फ़िल्म फेस्टिवल” में फ्रांस भेजा और फ़िल्म ने बेस्ट ह्यूमन डॉक्यूमेंट अवॉर्ड कांन्स में जीता फिर तो जैसे तांता लग गया इस फ़िल्म ने 11 इंटरनेशनल अवार्ड आपने नाम कियें जिनमें वैंकूवर में “बेस्ट फिल्म अवॉर्ड”, रोम में “वेटिकन अवॉर्ड” और टोक्यो में “बेस्ट फॉरेन फिल्म अवॉर्ड” भारत वापिस आने के बाद फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज़ा गया !

Pather panchali film poster

पथेर पांचाली के बाद तो उन्होंने फिल्मों की झड़ी लगा दी, अपने पूरे जीवन में रे ने कुल-जमा 37 फ़िल्में बनाई जिसमें से 32 को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलें इस बात से अंदाज़ा लगा लीजिये की रे का भारतीय सिनेमा में क्या योगदान रहा है !

तबियत नाशाज़ होने की वजह से 30 मार्च 1992 में खुद ऑस्कर के बड़े अधिकारियों द्वारा उन्हें कलकत्ता में “लाइफ टाइम अचीवमेंट, ऑस्कर” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Satyajit ray and his cimema

उनके कद का अंदाज़ा इससे लगा लीजिये की भारत रत्न, पद्मश्री, पद्म-भूषण, पद्म-विभूषण और रमन मैगसेसे जैसे पुरस्कारों से उन्हें सम्मानित किया गया था |


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Anuj Tiwari

• मोमिन ने कहा : "मैं वही हूँ मोमिन ए मुब्तिला" मैं 'मुब्तिला' हूँ और था, मैं वही देव हूँ जिसके लिये कहा गया है "निर्विघ्नं कुरू मे देव: सर्वकार्येषु सर्वदा" मैं वहीं था जब द्रोपदी के आंचल का पहला कोना दुशासन ने थामा था, मैं 'असद-ए-ख़स्ता जां" के "ख़स्ता" में हूँ, मैं ऊधौ के पैरों की धूल में था, मैं शिव के अमृत मंथन में ख़लल डालने वाला, मैनें विश्वकर्मा के छैनी हथौड़े चांडे, मैं बुद्ध के महापरिनिर्वाण का साक्षी, मैं वर्द्धमान का जिन, मैनें ब्रह्मा को एकाकार होते हुए देखा था, मैं शाहजहां के ताजमहल का मज़दूर जिसकी बांहे सलामत हैं, अर्जुन के गांडीव को बनाया मैनें, मैं तितलियों का मुसव्विर ! •

One thought on “सत्यजीत रे और उनका सिनेमा

  • August 18, 2020 at 8:21 pm
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    Wah♥️?

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