मर्सेडीस बरछा पार्डो: गेब्रियल गार्सिया मारकेज़ की म्यूज़

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लेडी बिहाइंड द बेस्ट नॉवेल ऑफ द वर्ल्ड

 

 

जब भी अंग्रेजी, कोलम्बियन और लैटिन अमेरिकन साहित्य की या मैजिक रियलिज़्म की बात होती है तो ज़हन में सबसे पहले गेब्रियल गार्सिया मारकेज़ के उपन्यास “One Hundred Years of Solitude” का नाम आता है।

साहित्य की कक्षा में ये किताब पढ़ाने से पहले मर्सेडीस बरछा पार्डो  का नाम गार्सिया मार्केज़  से पहले लिया जाता है। मुझे अच्छी तरह याद हैं, जिस चाव और उत्सुक्ता से हमारी प्रोफेसर ने ये नॉवेल पढ़ाने से पहले हमें मर्सेडीज़ के बारे में और कैसे उन्होंने गार्सिया मारकेज़ को ये नॉवेल लिखने के लिए प्रेरित किया बताया ।

उस क्लास में उस दिन के बाद क्या पढ़ाया गया मुझे कुछ नहीं याद, और शायद मेरी प्रोफेसर भी हर साल एक ही नॉवेल पढ़ाकर उक्ता गई थी, पर वो इस बात से नहीं उकताई थी की गार्सिया मारकेज़ ने एक साल के लिए खुद को एक कमरे बंद कर लिया और उनकी दुनिया को संभालने की पूरी ज़िम्मेदारी मर्सेडीज़ को दे दी। मर्सेडीज़ ही काम करने जाती, घर संभालतीं, बच्चों को संभालतीं, मार्केज़ को पेपर्स और बाकी ज़रुरत का सामान लाकर देतीं।

मर्सेडीज़ जब 9 साल की थी तब पहली बार मारकेज़ से मिली और तब से उनके बीच खतूतों के सहारे बात होती रही और 17 साल बाद उनकी शादी हुई। जब मारकेज़ के ज़हन में इस नॉवेल का पहला चैप्टर आया (जो वो तब से लिखना चाहते थे जब से वो 18 साल के थे) उन्होंने मर्सेडीज़ से कहा की अब मुझसे घर के काम काज और पैसों के बारे में कुछ मत पूछना और एक साल के लिए उन्होंने खुद को कमरे में बंद करके ये नॉवेल लिखी।

नॉवेल में कर्नल की म्रुत्यु के बाद जब वो कमरे से निकले तो सीधा मर्सेडीज़ के पास जाकर लेट गए, मर्सेडीज़ ने उन्हें देखते ही पूछा “कर्नल की मृत्यु हो गई” और वो 2 घंटे मर्सेडीज़ के पास रोते रहे।

प्रेम में होने की सबसे अच्छी बात ये है की प्रेम हमें रोने की आज़ादी देता है। 1982 में मार्केज़ को नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया और फिर आई शौहरत और शौहरत से मिलने वाली तन्हाई, अकेलापन, सॉलिट्यूड, एकांत। और ये एकांत मर्सेडीज़ और मारकेज़ ने साथ में जिया।


मर्सिडीज़ की झलक मारकेज़ की लगभग हर रचना में दिखती है।

मर्सेडीज़ का प्रभाव मारकेज़ के बनाए करैक्टरज़ में भी देखा जा सकता है : अर्सुला जो आपदा के वक्त पूरे परिवार को जोड़े रखती है और मर्सेडीज़, एक मात्र गूढ़ सुंदरता वाली लड़की जो आखिर में उस सॉलिट्यूड की कहानी सुनाने के लिए बच जाती है।


मर्सेडीज़ को अक्सर मारकेज़ की म्यूज़ कहा जाता है, और मारकेज़ उन्हें ‘मैनेजर ऑफ़ क्राइसिस’ बुलाते थे।

उनके बीच कभी कोई लैंगिक असमानता नहीं आई, अगर कभी मर्सेडीज़ उन्हें पैसे देना भूल जातीं तो वो कहते की आज मर्सेडीज़ ने पैसे नहीं दिए।

मारकेज़ कहते हैं की “मै ये बात नहीं मानता की लिखने के लिए दुख और तकलीफ की ज़रुरत होती हैं, लिखने के लिए अच्छे स्वास्थ, अच्छी परिस्थतिथि और ज़िन्दगी में प्यार की ज़रुरत होती है”। उनकी दुनिया में दोनों का महत्त्व बराबर था और उनका साथ प्रेम और समझदारी का साथ था।


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