कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

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बिजनौर जिले के एक छोटे से कस्बे में एक लड़का रहता था । उसके पिताजी पेशे से वकील थे और माँ घर की गृराज्यमंत्री जिसे आम भाषा में हाउस वाईफ भी कहा जाता है !

कहानी इसी लड़के की है । एक ऐसा लड़का , जिसके ऊपर कहानी तो दूर एक वक़्त को कोई मुहावरा कहने के लिए भी वक़्त न निकाले । मगर उसने मुझे मजबूर किया है कि मैं आज उसकी कहानी लिखूं !

खैर .. कहानी पर वापिस लौट कर चलते हैं । पिताजी वकील थे , माताजी घर संभालती थीं और उनके सुपुत्र मतलब हमारे कहानी के हीरो पीरियॉडिक टेबल के हाइड्रोजन की तरह आवारा घूमते रहते थे ।
बचपन में इनके बदमाशी के किस्से मशहूर थे! पढ़ाई लिखाई से कुछ लेना देना नहीं था और क्रिकेट की दुनिया के सचिन या संगीत की दुनिया के सोनू निगम बन सकते , इसकी भी संभावना न के बराबर थी ! कुछ थे तो बस आम कद – काठी के 55-60 किलो वजनी एक भारी इंसान , जिनके लिए देहरी पर रखे पुराने पोंछे के कपड़े की उपमा दी जा सकती है ।

लोगों के बच्चे जब बड़े होते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। ऐसा लगता है कि मुसीबतों की मूसलाधार बारिश में उनके सर पर एक छत तैयार हो रही है । लेकिन इस कहानी के नायक वो पुत्र थे , जो पिता के खरीदे छाते को भी ले भागता है ।
कहते हैं कि बाप का जूता जब बेटा पहनने लगे तो बाप का कंधा हल्का होता है ।
पर यहां मामला ऐसा था कि भाई साहब खुद बाप के कंधे पर बैठ के दिन प्रतिदिन उनकी कमर तोड़ा करते ।
जब इनके स्कूल में दाखिले का वक़्त आया तो पिताजी ने सोचा कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ए एम यू में दाखिला दिला देते हैं , जहां 15% सीटें रिजर्व होती हैं और जुगाड़ है जो काम कर जाएगा। पर हमारे हीरो की फूटी किस्मत की उतने आसान से टेस्ट में भी चयनित न हो सके।

इनकी पढ़ाई लिखाई जैसे – तैसे होती और समय के साथ उम्र बढ़ती जा रही थी ।
प्यार मुहब्बत में भी स्ट्राइक रेट शून्य का चल रहा था।

कुल मिला कर एक ऐसा लड़का जो न ठीक से बदमाश ही था और न तो ठीक से पढ़ाकू ।
स्कूलिंग के बाद ए एम यू में बीएससी के लिए अप्लाई करने वाले हमारे नायक को वहां से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

उसी बीच , आईआईटी – जेईई का फॉर्म निकला।
हमारे नायक अपने पिताजी के साथ बैठ कर टीवी देख रहे थे।
बातों ही बातों में पिताजी ने फार्म भरने की बात करी।
हमारे हीरो के मुंह पर नौ रस और सातों सुर अपने आप थिरकने लगे ।
मुंह थोड़ा खुला रह गया और अपने पिताजी के अडिग विश्वास को देख कर हंसी भी आईं और रोना भी ।
अब चूंकि हीरो रोते नहीं है तो हीरो ने मुस्कुरा कर काम चला लिया ।
ख़ैर, नायक ने फार्म भी भरा और एग्जाम भी दिया ।
अगली लाइन में कोई जादू थोड़ी होने वाला है ! जेईई के एग्जाम को देते वक़्त हीरो को लगा कि ये पेपर किसी अलग लिपि में लिखा गया है ! शायद वो भाषा, जो इनके बहुत ऊपर से जा रही है ।
आधे घंटे जंग लड़ने के बाद बहादुर एग्जाम हॉल छोड़ कर भाग निकले ।

अब विकट समस्या आन पड़ी थी । समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए !
हीरो ने सोचा , चलो स्टेट लेवल का कोई एंट्रेंस देते हैं ।
उन्होंने यूपीटीयू का एंट्रेंस दिया , जिसके बारे में कहा जाता है कि अगर आप आंख बंद कर के कुछ उत्तर दे के आएंगे फिर भी चांस है कि एक कॉलेज मिल जाएगा ।
पर किस्मत ऐसी चीज है, कि जब बिगड़नी शुरू होती है तो राजाओं के राज पाठ तक चले जाते हैं, एक स्टेट लेवल के एंट्रेंस की औक़ात क्या है ।

इनकी कोई रैंक तक नहीं आई ।

 


अब जैसा की सब जानते हैं, जिनका कोई नहीं होता उनका ख़ुदा होता है और ख़ुदा हर जगह नहीं हो सकता तो उसने प्राइवेट इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी बनाई है ।
इन्होंने ऐसी ही एक ‘चमचमाती ‘ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया । गिरते पड़ते कैसे भी कर के अपनी इंजीनियरिंग खत्म की और जब प्लेसमेंट्स का वक़्त आया तो इन्हे किसी ट्रेड रिसर्च की कंपनी ने भी लेना मुनासिब न समझा।

अब भारत से इनका मन उचट चुका था ! इन्होंने सोचा क्यूं न विदेशो में हाथ पांव मारा जाए !
इन्होंने विदेश में जा कर पढ़ाई करने के लिए IELTS की परीक्षा दी और जो कि इनके साथ होता आया था , ये फैल हुए !
घर वालों की घुड़की और जमाने के प्रैशर के चलते हीरो ने दिल्ली आ कर सिविल सर्विसेज के एग्जाम देने की ठानी ।
पहली बार में बिचारे को समझ में ही नहीं आया कि
ये आखिर क्या हो रहा है ! न तो सिलेबस समझ आया और ना ही एग्जाम का पैटर्न ।
रिजल्ट हुआ कि बिचारे प्री एग्जाम में ही फैल हो गए ।
पर धीरे धीरे एक लय बनने लगी । कहते हैं दुनिया दो लोगों की होती है । एक , जिनको जीतने की लत लग चुकी होती है और दूसरी, जिनको हारने से डर नहीं लगता ।
उस धूल के टुकड़े को, जिसको कभी हवा उड़ा ले जाती है तो कभी जूतों पर रगड़ खाता है लेकिन जब कड़ी आँच में तपाया जाता है तो वो ईंट बन कर निकलता है , और फिर उस ईंट के पीठ पर एक बड़े घर का भार टिकता है ।

यूपीएससी के अपने तीसरे अटेम्प्ट में हमारे नायक प्री क्वालीफाई कर गए, पर आगे नहीं बढ़ पाए ।
इस जगह तक आ जाने के बाद बहुतों के हिम्मत की कमर टूट जाती है।
कई लोग अपने किस्मत से समझौता कर चुके होते हैं ।
कई योद्धा हथियार डाल देते हैं।
पर जिस वक़्त आपको लगने लगे कि अब इस से ज्यादा प्रयास आप नहीं कर सकते , अगर उस वक़्त आपने ख़ुद को नए प्रयास के लिए मना लिया, यकीन मानिए अगले प्रयास में आपके माथे पर विजय का चंदन लगता है ।

हमारे इस कहानी के नायक ने भी अपने हिम्मत हार चुके क़दमों को एक और क़दम आगे चलने के लिए मनाया , और आखिरकार चौथे प्रयास में आई आर एस बन कर निकला अपना हीरो …

सफलता मिल चुकी थी । पर क्या इतने दिनों तक इतनी दिक्कतें इस तरीके की सफलता के लिए गईं ?
शायद नहीं ।
कुछ मिल चुका था । पर कुछ और बड़ा चाहिए था..
कुछ ऐसा , जो यादगार बने..
कुछ ऐसा , जो अब तक की सही परेशानियों के साथ न्याय कर सके..
लड़के ने एक और अटेम्प्ट दिया , और आखिरकार पांचवे अटेम्प्ट में अपने हीरो ने स्कोर किया ऑल इंडिया रैंक 3 ।

 

एक लड़का , जो कैंपस प्लेसमेंट तक नहीं ले सका था, वो आज भारत के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक ” यूपीएससी” में न सिर्फ चयनित हुआ था , बल्कि तीसरा रैंक हासिल किया था !
यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं है।
यह कोई फिक्शन भी नहीं ।
इस कहानी का हीरो वही हारा हुआ इंसान है जो अभी आप हो या इस कहानी को लिखने वाला ।
उसकी जिंदगी में भी चीजें ऐसी हुई हैं जो उसने कभी करना नहीं चाहा ।
वो तो दर असल इस कहानी को पढ़ रहे उन कई लोगों से भी गया गुजरा था , जिनकी कुछ नहीं तो कॉलेज से प्लेसमेंट तो हुई ही थी ।
इस कहानी का हीरो कोई लीड नहीं बल्कि साइड एक्टर है , जो महज़ इतना सोच पाया कि उसे हीरो को सपोर्ट भर करते हुए नहीं मरना है ।

उसे वहीं घिसी पिटी ज़िन्दगी नहीं जीनी है जो वो जी रहा था । उसने तो कदम भर बढ़ाया और रास्ते खुद ब खुद उसके कदम चूमने चले आए ।
हां पर इतना ख्याल तो रखा .. पैरों में चुभे कांटे को उसने गाली न दे कर उनसे आगे से सावधानी से चलने की सीख ली ।
वो आईआईटी से नहीं पढ़ा । वो बहुत रईस घर से भी नहीं है ।
वो दर असल हम और आप लोगों के बीच से ही निखर निकला एक महकता गुलाब है , जो पतझड़ से उजड़ा भी है और बहार ने जिसे दुलारा भी है ।

उस लड़के का नाम है जुनैद अहमद और जुनैद ने यूपीएससी 2018 में पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था ।
और मेरी कहानी के अगले असली हीरो न आप भी बन सकते हो । जुनैद बन सकते हैं तो आप क्यूं नहीं ।
बस थोड़ा जोर ही तो लगाना है ।
लगा दो..
कितना वक़्त लगता है एक कदम बढ़ाने में …
~अनिक


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