जाने क्या ढूँढ़ता है ये मेरा दिल

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किसी भी सफ़र के शुरुआती कुछ मिनट मैं अक्सर अकेला होता हूँ पर चार छः मिनट बाद रास्ते पर खड़ा हुआ कोई आदमी दिखता है जिसके हाथ में एक गिटार है और आँखों पर चश्मा। अपने हाथ को हवा में यूँ घुमाता है मानो इशारे से कह रहा हो क्यों भाई अकेले-अकेले कहाँ चले ?

इस अकेले-अकेले के जवाब में हमें कभी ये कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती कि हमको जॉइन कर लो। जिसको आना होता है वो अपनी जगह बना कर बैठ जाता है।

ऐसा ही है लकी अली, सफ़र के शुरू होते ही गाड़ी का दरवाजा खोलता है, अपना चश्मा हटा कर हल्का सा मुस्कुराता है और बगल की सीट पर आकर बैठ जाता है।

उसकी आँखें मेरी आँखों से एकदम मिलती हैं, जिनमें कई सारे अनजान रास्तों की झलक है और कई सारे सवाल हैं। ऐसा नहीं है कि लकी अली के साथ मुझे सवालों के जवाब मिल जाते हैं बस हम एक से दो हो जाते हैं। जिनके सवाल समान हों वो एक दूसरे से सवाल नहीं करते और ज़रूरी भी नहीं कि साथ मिलकर जवाब ढूँढ़ने लगें, बस साथ-साथ उन सवालों को गुनगुनाने लगते हैं, उन पर झूमने लगते हैं। तब हम मंज़िल की फ़िक्र छोड़ रास्ते का भरपूर मज़ा लेते हैं। वो गिटार पर धुन बजाता है और हम दोनों साथ साथ गाना शुरू कर देते हैं “जाने क्या ढूँढ़ता है ये मेरा दिल तुझको क्या चाहिए ज़िन्दगी?”

लकी अली की एक ख़ास बात ये भी है कि मुझे रास्ते में कभी अकेला छोड़ कर नहीं जाता। बस में हूँ तो कंडक्टर बनकर, ट्रेन में हूँ तो सहयात्री बनकर,यहाँ तक कि कैब में भी हूँ तो वहाँ भी ड्राइवर बनकर मुझसे टकराता है और कहता है
“यू हैव बीन हियर बिफोर, हैवंट यू ?”

सफर चाहे पन्द्रह मिनट का हो या पन्द्रह घंटों का, कार की सीट से टिका हुआ सिर हो या ट्रेन या बस की खिड़की से झाँकती गर्दन, कैब की ऑक्स केबल हो या अपने इयरफोन, लकी अली को मैंने अक्सर अपने साथ पाया। और जब कभी लकी अली आसपास न दिखे तो देखता हूँ कि एक बिना छत की लाल कार में लकी अली “हैरत” गाते हुए बगल से गुज़र जाता है और फिर मैं उस कार के पीछे लग जाता हूँ।

आप अब तक अकेले सफ़र कर रहे हैं और लकी अली को नहीं सुना तो इंतज़ार किस बात का, इधर जाईये और गोते लगाईये लकी अली के साथ ।

 


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4 thoughts on “जाने क्या ढूँढ़ता है ये मेरा दिल

  • July 19, 2020 at 10:51 am
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    शाम सवेरे तेरी यादें आती हैं
    आके दिल को मेरे
    यूँ तड़पाती हैं??

    Reply
  • July 19, 2020 at 12:13 pm
    Permalink

    जिनके सवाल समान हों वो एक दूसरे से सवाल नहीं करते और ज़रूरी भी नहीं कि साथ मिलकर जवाब ढूँढ़ने लगें, बस साथ-साथ उन सवालों को गुनगुनाने लगते हैं, उन पर झूमने लगते हैं। ❤️❤️❤️

    Reply

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