फ़िल्म गॉडफ़ादर के गॉडफ़ादर की दास्तान !

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 गॉडफ़ादर की दास्तान

 

अशोक पांडे की एक रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति जिस पर एक बेस्टसेलर को जल्दी जल्दी फिल्म में तब्दील देने का दबाव था. वह युवा था और जिन अभिनेताओं के साथ उसे काम करना था वे या तो उसी की तरह कम अनुभवी थे या अपने करियर के ढलान पर थे.

प्रोड्यूसर ने बहुत कम बजट तय कर रखा था. मुश्किलें इतने पर ही नहीं निबट रही थीं. सेट्स पर काम कर रहे यूनिट के अधेड़ अनुभवी कर्मचारी उसकी पीठ पीछे उसकी महत्वाकांक्षा का मजाक इस तरह उड़ाते थे कि उनकी बातें उसके कान में पड़ जाएं.

ऐसे ही एक दिन सेट पर बढ़ती जा रही बेतरतीबी के बीच घनघोर निराशा और अवसाद में आकर वह खुद को वॉशरूम में बंद कर लेता है. वहां भी उसे सेट से आ रही आवाजें सुनाई देती हैं जिनमें निर्देशक को बदले जाने की चर्चा है.

बाद में वह मजबूर होकर अपने परिवार वालों की मदद लेता है. यहाँ तक कि अपनी सगी बहन को फिल्म में रोल करने के लिए राजी करता है. यह हमारे समय की सबसे बड़ी क्लासिक के बनने से जुड़ी कुछ कहानियां हैं.

 

फ्रांसिस फोर्ड कपोला के बचपन की तसवीर !

उसके बचपन में चला जाय. पिता बांसुरीवादक थे और पैसे लेकर शास्त्रीय कंसर्ट्स में काम करते थे. जाहिर है काम कभी मिलता था कभी नहीं. किराया न दे पाने या और किसी न किसी वजह से उन्हें अक्सर घर बदलना पड़ता. उसी हिसाब से बच्चे को भी अपना स्कूल बदलना होता था. उसे अक्सर सेमेस्टर के बीच में एक स्कूल से दूसरे में दाखिल करवाया जाता.

नौ साल की उम्र में उसे पोलियो हो गया जिसके कारण एक साल बिस्तर पर बिताना पड़ा. आधी देह में लकवा मार गया था और उसे पूरी तरह क्वारान्टीन में रखा गया था.

मनोरंजन के लिए उसके पास एक 8 एमएम प्रोजेक्टर, कुछ कठपुतलियां और एक टीवी जैसी चीजें थीं. उसने अपने आप माँ-पिता और भाई-बहनों द्वारा घर के कैमरे से शूट किये तमाम पुराने वीडियोज को एडिट करना सीख लिया.

उसने तरह तरह की आवाजें निकालना भी सीखा और फ़िल्में एडिट करते हुए अर्जित की गयी इस नई प्रतिभा का भी इस्तेमाल किया. एडिट की हुई फिल्मों में साउंड डालने के लिए उसने टेपरिकार्डर की मदद ली.

 गॉडफादर के डाइरेक्शन के वक़्त कपोला !

जब वह बीमारी से उबरा उसने अपने पड़ोसी बच्चों को अपनी बनाई फ़िल्में दिखाना शुरू किया. इसके एवज में वह उनसे पैसे भी लेता था. यह उस बच्चे के एक सर्वकालीन सफलतम निर्देशकों में से एक में तब्दील होने की कहानी का शुरुआती हिस्सा है. यह ‘गॉडफादर’ के डायरेक्टर फ्रांसिस फोर्ड कपोला की कहानी है.


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Anuj Tiwari

• मोमिन ने कहा : "मैं वही हूँ मोमिन ए मुब्तिला" मैं 'मुब्तिला' हूँ और था, मैं वही देव हूँ जिसके लिये कहा गया है "निर्विघ्नं कुरू मे देव: सर्वकार्येषु सर्वदा" मैं वहीं था जब द्रोपदी के आंचल का पहला कोना दुशासन ने थामा था, मैं 'असद-ए-ख़स्ता जां" के "ख़स्ता" में हूँ, मैं ऊधौ के पैरों की धूल में था, मैं शिव के अमृत मंथन में ख़लल डालने वाला, मैनें विश्वकर्मा के छैनी हथौड़े चांडे, मैं बुद्ध के महापरिनिर्वाण का साक्षी, मैं वर्द्धमान का जिन, मैनें ब्रह्मा को एकाकार होते हुए देखा था, मैं शाहजहां के ताजमहल का मज़दूर जिसकी बांहे सलामत हैं, अर्जुन के गांडीव को बनाया मैनें, मैं तितलियों का मुसव्विर ! •

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