अमृता प्रीतम की पांच किताबें

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अमृता प्रीतम

किसी भी लेखक को उसे पढ़ कर याद किया जाना चाहिए। अमृता प्रीतम जिन्होंने एहसास की नब्ज़ पकड़कर, उन्हें कविताओं और कहानियों का रूप दिया। जो बेनियाज़ होकर प्रेम करने को ही ज़िन्दगी मानती थीं। अमृता प्रीतम जिन्होंने आम इंसानो की व्यथा, आम इंसानो के प्रेम और उस प्रेम के त्याग की कहानियां लिखीं।

 

 

1. अदालत

ये एक दार्शनिक उपन्यास है, stream of consciousness में लिखी गई किताब। इक़बाल एक नौजवान जो खुदा की अदालत में खड़ा है और लोग उसकी ज़िन्दगी पर लांछन लगाते हैं। इक़बाल के ज़हन से गुजरने वाली हर स्मृति हर रंग को कैद किया गया है।

 

 

2- एक थी सारा

 

पाकिस्तान की मशहूर कवि और अमृता प्रीतम की दोस्त सारा शगुफ्ता की ज़िन्दगी बड़े दर्द में गुज़री उन्होंने 1984 कराची में ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या कर ली। सारा, अमृता प्रीतम को ख़त लिखा करती थी और उन खातों से निकालकर अमृता प्रीतम ने ये उपन्यास लिखा। किस तरह समाज पहले तो औरत की तरक्की होने नहीं देता और अगर हो भी जाए तो उस औरत का दम घोंट दिया जाता है

 

समुन्दर के लिए लहर ज़रूरी है
औरत के लिए ज़मीन ज़रूरी है…
अमृता ! वह ब्याहने वाले लोग कहाँ गए ?
यह कोई घर है ?
कि औरत और इज़्ज़त में कोई फ़र्क नहीं रहा…
कभी मैं दीवारों में चिनी गई
कभी बिस्तर में चिनी जाती हूं…. “

 

 

3- मन मिर्ज़ा तन साहिबां

 

श्री रजनीश पर किया गया अमृता प्रीतम का चिंतन, जिसमे प्रेम, मज़हब, समाज और सियासत पर उन्होंने अपने ख़याल लिखें हैं। एक लेख में अमृता कहती हैं –

“अगर कोई कहे, आप प्रेम करो, लेकिन आपकी आँखों से अमृत न बरसे, आपका दिल एक ख़ास तरह से न धड़क उठे, और आपके सांस एक ख़ास तरह से न महक उठें, आप प्रेम करो, पर शरीर पर कुछ प्रकट मत होने दो, तो आप जान पाएंगे कि यह हो नहीं सकता…”

 

 

4- सितारों के अक्षर और किरनों कि भाषा

श्री आचार्य राज के ज्ञान पर आधारित अमृता प्रीतम ने सपनों कि ताबीर की है। इस किताब में अमृता ने दुनिया का पहला सपना, व्याकुल सीता के बारे में श्री राम का सपना, जग हांसिल करने से पहले तैमूर का सपना, खुशवंत सिंह का सपना और कई अन्य सपने और उन सपनों की ताबीर की है।

 

5- नागमणि

एक आर्टिस्ट कुमार और उसकी स्टूडेंट अल्का के बीच के बदलते संबंधों की एक ख़ूबसूरत कहानी। वो रिश्ता जो जिस्मानी लेन देन से शुरू होकर रूहानी इश्क तक पहुँच जाता है। एक आर्टिस्ट की ज़िन्दगी, उसका अपनी बनाई पेंटिंग्स से रिश्ता और उसका कुदरत के संकेत कैनवास पर उतारना दिखाया गया है।

“कुमार : तुम मेरे लिए उस औरत जैसी होगी जिसका कोई नाम नहीं होता या उसका कोई नाम हो भी सकता हैं।
अल्का: यह तो बहुत बड़ा दर्जा है !
कुमार: क्या मतलब ?
अल्का: खुदा का भी कोई नाम नहीं होता और उसका कोई नाम हो भी सकता है !”


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