इंजीनियर्स डे स्पेशल – देश की आधी ताकत इंजीनियरिंग करके पैशन फॉलो करने में जा रही है

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परसाई जी ने कहा था कि देश की आधी ताकत लड़कियों की शादी करने में जा रही है, वो आज होते तो कहते देश की आधी ताकत इंजीनियरिंग करके पैशन फॉलो करने में जा रही है।

एक इंजीनियरिंग का स्टूडेंट चार साल बीटेक करके लेखक, शायर, एक्टर, यूट्यूबर, फोटोग्राफर, मीमर, पीओ, चपरासी सब कुछ बन जाता है पर इंस्टाग्राम पर बोल्ड लैटर्स में इंजीनियर ही लिखता है। हाँ फेसबुक पर E और r को साथ चिपका कर Er तो वो फेयरवेल के दिन ही लिख लेता है। इंजीनियरिंग के मीम्स और जोक्स पढ़कर वह एक अलग ही गौरव का अनुभव करता है।

यदि मैं इंजीनियर होता –

स्कूल में एक निबंध लिखने को आता था, “यदि मैं प्रधानमंत्री होता“, उस निबंध में ही बच्चे पूरा देश सुधार कर रख देते थे। उसी तर्ज़ पर यदि आज के समय में पूछा जाये “यदि मैं इंजीनियर होता”, तो आधे से ज़्यादा बच्चे लिखेंगे कि यदि मैं इंजीनियर होता तो इंजीनियरिंग करने के बाद लेखक बन जाता, एक्टर बन जाता, मीमर बन जाता, गिटार बजा बजा कर यूट्यूबर बन जाता।

क्योंकि जिस तरह से हर फील्ड में ये इंजीनियरिंग वाले घुसे हैं वो दिन दूर नहीं है जब इंजीनियरिंग करना ही पहली योग्यता मान ली जाये, कि हे हे आपने तो इंजीनियरिंग की है, पानी वाली दाल और मैगी के साथ आपने ही गुज़ारा किया है, नाश्ते के भटूरे के चक्कर में आप ही रात भर जागकर सुबह नाश्ता करके सोते थे, इतने स्ट्रगल के हिसाब से तो पैशन वाला सारा काम आपके हवाले ।

कौन मनाता है ये इंजीनियर्स डे –

इंजीनियर्स डे पर इतना हल्ला तो एक असली वाला सच्ची मुच्ची का इंजीनियर नहीं करता जितना इंजीनियरिंग छोड़कर बाकी सब काम करने वाले मचा रहे होते हैं। तुम्हें यार पहले तो इंजीनियरिंग में नौकरी मिली नहीं, मिली तो तुम टिक नहीं पाये, फिर जैसे तैसे तुमने पैशन फॉलो कर के अपना फेसबुक पेज बना लिया और फिर उसी पेज पर पोस्ट करते करते अपने जैसे इंजीनियर को नेक्स्ट लेवल पर पहुँचा दिया। अब हाल ये है कि सुबह सुबह गाँजा मार कर क्लास जाने वाला सेकंड ईयर का लड़का भी खुद को महादेव से कम नहीं समझता।

 

इंजीनियर्स डे पर बी टेक फोटोग्राफर इंजीनियरिंग के नमूनों की ज़बरदस्त फोटोज़ पोस्ट करता है, बीटेक राइटर कॉलेज लाइफ के नास्टैल्जिया पर कविताबाजी करता है और जो बीटेक वाला कुछ नहीं करता वो हर साल रैगिंग की ही कहानियाँ सुनाता रहता है। पर जो बंदा कहीं सच में इंजीनियरिंग प्रोफेशन में चला गया वो बेचारा “हैप्पी इंजीनियर्स डे” लिखकर व्हाट्सएप्प स्टेटस ही लगा पाता है।

इंजीनियरिंग करने की खास वजहें –

  • इंटर में साइंस लेकर ज़्यादा नंबर आ गये थे और ज़्यादा नंबर वाला लड़का इंजीनियरिंग करता ही है।
  • मौसी ने कहा इंजीनियरिंग कर लो बहुत स्कोप है।
  • घर से दूर रहने का अच्छा बहाना है।
  • इंजीनियरिंग वाले मीम्स समझने के लिए।

इंजीनियरिंग के दौरान आने वाली दिक्कतें –

  • तुम ख़ुद को इंजीनियर मानो या न मानो पर एडमिशन लेते ही घरवाले तुम्हें इंजीनियर सिद्ध कर चुके होते हैं, यहाँ तक कि घर में   किसी की शादी हो तो  कार्ड पर तुम्हारे नाम के  आगे कोष्ठक में इंजीनियर लिखवा देते हैं ।
  • इंजीनियरिंग अगर सरकारी कॉलेज से हो तो चार साल सबको यही समझाते निकलेंगे कि भैया सरकारी कॉलेज से सरकारी नौकरी नहीं  मिलती।
  • गलती से सिविल इंजीनियरिंग कर ली तो जो आदमी दिखेगा नक़्शे बनवाता फिरेगा तुमसे, फिर तुम समझाओ कि भिया सिविल में नक्शा नहीं बनवाते ।
  • बाकी घर आस पड़ोस के पंखे कूलर की ज़िम्मेदारी तुम पर आयी सो वो अलग । कोई बताओ कि कपडे से पकडकर बल्ब बदलने को इंजीनियरिंग नहीं कहते ।

इंजीनियर कौम से ज़्यादा चालाक कोई दूसरी कौम नहीं, वो ख़ुद ही इंजीनियरिंग की बुराई करते हुए बड़ा सा आर्टिकल लिखता है पर आखिरी में “लाइफ के असली मजे तो इंजीनियरिंग में है” लिखकर कलम तोड़ देता है। तो इसी क साथ आस पड़ोस के लोगों को बताईये कि इंजीनियरिंग इज़ आलवेज़ कूल ।


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