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क्या है ढिबरी ?

” अरे ए बचवा, देखिया तेज आंधी आवत है लाइन कट जाई
ढिबरी-ललटेन रख लीहा”
– “अम्मा ढिबरी कत्तो ना दिखत है”
“अरे ऊंहीं होइ आँगनवा में देखा धियान से!”
– “अरे कहत त हैं ना मिलत है-
रुका एक ठो बना देत हईं। मिट्टी के तेल कहाँ बा?”
” रसोई में देखा”

कितना आसान था, उनके लिए भी अपने हिस्से की रौशनी पैदा करना जिनका सूरज नहीं उगता। इतनी ही आसान और सरल है ढिबरी या यूं कहें कि हुआ करती थी। कहीं खो गयी है। लेकिन इस आसानी और सरलता को ध्यान में रखियेगा और अच्छे से परिचित भी हो जाएं तो अच्छा क्योंकि Thedhibri.com पर यही सरलता गाहे ब गाहे आपसे दो चार होती रहेगी।

 

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एक लोक कथा है कि अंधेरे जंगल में पहाड़ी के पार चार पेड़ हैं और चारों पर अलग अलग फल लगते हैं। 
आप पूछेंगे ख़ासियत क्या है उन पेड़ों की?
हम कहेंगे कि अंधेरे जंगल में पहाड़ी के पार जाकर ही क्यों नहीं देख लेते।
वैसे एक रास्ता और भी है, थोड़ा आसान वाला!
फ़्लैश फ़िक्शन का चक्कर लगा आइए, शायद आपको पेड़ मिल जाये या उससे भी कुछ बेहतर
 
एक बात बताऊं तो मानेंगे?
” एनकाउंटर” करवा दें आपका?
अरे घबराइए नहीं हर एनकाउंटर बुरा नहीं होता, यही तो ‘पॉइंट ऑफ व्यू’ है। जहाँ आप देखेंगे उसी बात को बस अलग नज़रिये से
 
कहावत सुनी होगी ‘तीतर के आगे दो तीतर तीतर के पीछे दो तीतर बताओ कितने तीतर’ कोई बोलेगा तीन तीतर, कोई ज़्यादा समझदार बोलेगा 6। और हम बोलेंगे बकवास बन्द करो कितने भी तीतर हो हमें क्या!
ये वेबसाइट ख़रा सोना है यहाँ सिर्फ़ ख़री बातें होती हैं। हाँ सच में, यकीन का हो तो देख आइये हमारा सेक्शन “ख़री ख़री”
 
और साहब क्या बताए अब तो वो मज़ा ही नहीं आता जो हमारे ज़माने में आया करता था।
किसी महापुरुष ने कहा है “प्रेजेंट टाइम इस नेवर गोल्डन” कौन है महापुरुष?
हमारी राइटिंग टीम में से ही कोई होगा। ख़ैर हम तो ये कह रहे थे कि देख तो आइए एक दफ़ा “हमारा ज़माना” और क्या आपको मज़ाक़ लगा?
 
अगर ऊपर वाला पैराग्राफ़ मज़ाक लगा भी हो तो ऐसे मज़ाक़ को तो दिल से लगाना ही बेहतर है।
अच्छा दिल से याद आया कभी दिल लगाया आपने? 
अरे किसी काम किसी चीज़ से तो लगाया ही होगा हाँ तो बस अगर आपने यहाँ तक पढ़ लिया है तो दिल लग चुका है आपका ढिबरी से।
अब जब दिल लग ही गया है तो हम कहते हैं थोड़ी शेर-ओ-शायरी हो जाये!
नहीं नहीं समोसे के आलू और आपकी शालू को रहने दीजिए जाकर हमारे सेक्शन में कविताएं पढ़िए। वैसे शालू और आप साथ में भी पढ़ सकते हैं आपकी मर्जी।
 
निरंतरता हमेशा निपुणता को पछाड़ देती है।
निरंतर रहेंगे तो निपुण भी हो जाएंगे।
बाकी हाँ वो क्या कहते हैं कूल लोग, की हमें अपना फीडबैक
 देना न भूलें अब ढिबरी आपके ही घर की है तो अच्छा बुरा आपका पड़ोसी बताएगा तो आपको भी अच्छा नहीं लगेगा न।
इसीलिए कहते हैं हमें लिख भेजिए !
 

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